कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने उत्तराखंड के हेल्थ मिनिस्टर धन सिंह रावत पर बड़ा हमला किया है. करन माहरा और उनके साथ मौजूद रहे गणेश गोदियाल ने स्वास्थ्य विभाग में गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए.
करन माहरा कागजों का एक बड़ा पुलिंदा लेकर मीडिया के सामने आए और आरोप यह लगाया जो सामान 50 हजार तक में मिल रहा है उसको साढ़े पांच लाख रुपए में खरीदा जा रहा है. उन्होंने वैसे तो कई सारे मामले उठाए, कई आरोप लगाए हैं, लेकिन दो मामलों पर चर्चा अधिक जरूरी हो जाती है.
इन दो मामलों पर चर्चा इसलिए अधिक जरूरी हो जाती है, क्योंकि इनमें से एक विषय तो बीजेपी के नैनीताल सांसद अजय भट्ट ने भी उठाया है, उनकी एक चिट्ठी सोशल मीडिया पर वायरल भी हो रही है, आजकल. और दूसरा मामला इसलिए अधिक गंभीर माना जाना चाहिए, करन माहरा कह रहे हैं, एक ऐसा उपकरण स्वास्थ्य विभाग ने खरीदा है, जिसको जांच में फेल बता दिया गया था.
करन माहरा ने राज्य में स्वास्थ सुविधाओं की कमी और उपकरण खरीद में करोड़ों रुपये के घोटाले का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा की खून जांचने का उपकरण वेन फाइंडर, जो अधिकतम 50 हजार रुपये में मिल सकता है, उसे स्वास्थ विभाग ने पांच लाख रुपये प्रति यूनिट खरीदा है. इसके लिए कुल पांच करोड़ रुपये खर्च किए गए.
कांग्रेस मुख्यालय भवन में शनिवार को प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए माहरा ने कहा कि भाजपा राज में घोटालों की बाढ़ आ गई है. उन्होंने कहा कि पांच सिटी स्कैन मशीनें 30 करोड़ रुपये में खरीदी गई. डेढ़ वर्ष बीत जाने के बाद भी विभिन्न स्थानों के लिए खरीदी गई ये मशीनें स्टॉल नहीं की गई हैं, जबकि संबंधित कंपनी को पूरा भुगतान कर दिया गया. वहीं, 60 करोड़ रुपये मूल्य की एमआरआई मशीनें चीन की कंपनी से खरीदी गईं. जबकि एक भारतीय कंपनी के बिट में कम रेट लगाने के बाद भी उसे बाहर कर दिया गया. उन्होंने बदरीनाथ और केदारनाथ में अस्पताल भवन निर्माण और उपकरण खरीद में भी धांधली का आरोप लगाया.
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने भी स्वास्थ्य मंत्री पर हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया की स्वास्थ्य मंत्री के घर से तबादला उद्योग चल रहा है. नियमों की धज्जियां उड़ाकर कर्मचारियों के ट्रांसफर किए जा रहे हैं.
करन माहरा के आरोप गंभीर हैं, वो और भी कई आरोप लगा रहे हैं, उत्तराखंड के स्वास्थ्य विभाग या फिर हेल्थ मिनिस्टर को इसका जवाब देना चाहिए.
गणेश गोदियाल ने इस मौके पर एक बड़ी बात कही, उन्होंने कहा, यदि हमारी बात गलत है तो विभाग या मंत्री जवाब दे, तथ्यों के साथ धन सिंह रावत या फिर उनके विभाग की तरफ से जवाब आना भी चाहिए, क्योंकि गणेश गोदियाल यह भी कह रहे हैं, यदि हमारी बातों पर जवाब नहीं आया तो यह मान लिया जाएगा, हमारी सारी बातें सही हैं.
वैसे तो गणेश गोदियाल ने धन सिंह रावत के विभागों में हुई भर्तियों की सीबीआई जांच की मांग की है, उन्होंने कहा है, यह जो पेपर लीक कांड की जांच सीबीआई को सौंपी गई है, इसी जांच का विस्तार करते हुए धन सिंह रावत के विभागों में हुई भर्तियों की जांच भी सीबीआई को दे देनी चाहिए.

करन माहरा ने बीजेपी के नैनीताल से सांसद अजय भट्ट की एक चिट्ठी का हवाला दिया, यह पत्र अजय भट्ट ने एक अक्तूबर को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को लिखा है, इसके बाद अजय भट्ट ने मीडिया से बात भी की है.
यह मामला क्या है, पहले आप यह समझिए, हल्द्वानी के सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज में एक कैथ लैब बननी है, ताकि पूरे कुमाऊं मंडल से आने वाले हृदय रोगियों का समुचित उपचार हो रहे. इस कैथ लैब के निर्माण का काम सौंपा गया है, मंडी परिषद को.
अजय भट्ट ने वैसे तो इस पर ही सवाल उठा दिया है, यह काम मंडी परिषद को क्यों सौंपा गया? क्या मंडी परिषद को इस तरह के कामों का अनुभव है? उन्होंने अपने पत्र में लिखा है, इस निर्माण के लिए मंडी परिषद को दो करोड़ 39 लाख रुपए की धनराशि जारी भी कर दी गई है.
अजय भट्ट का कहना है, मैंने खुद जाकर मौके पर देखा है. मंडी परिषद ने जो निर्माण कार्य किया है, वो इतना निम्नस्तरीय है, अभी से छत ही टपक रही है, बीजेपी सांसद ने मुख्यमंत्री के चिट्ठी लिखकर इस विषय पर संज्ञान लेने का अनुरोध किया है.
बीजेपी के सांसद अजय भट्ट के आरोप गंभीर हैं. अजय भट्ट यह कह रहे हैं, मेरी किसी से नाराजगी नहीं है, लेकिन यदि कोई उत्तराखंड के धन का दुरुपयोग करेगा तो उसको माफ नहीं किया जाएगा, चाहे वो मेरा भाई ही क्यों ना हो.
अब सवाल दो है, एक – क्या धन सिंह रावत बुरी तरह से घिर रहे हैं? कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल का एक साथ आकर प्रेस कांफ्रेंस करना एक बड़ा संदेश देता है?
गणेश गोदियाल पिछले लंबे समय से धन सिंह रावत को घेर रहे हैं. वो बड़े गंभीर आरोप उन पर लगाते रहे हैं. अब करन माहरा और गणेश गोदियाल एक साथ खड़े हुए दिख रहे हैं, इस मामले में. इसलिए सवाल यह उठ रहा है, क्या धन सिंह रावत श्रीनगर में अपनी राजनीतिक जमीन के साथ साथ भ्रष्टाचार के आरोपों में घिर रहे हैं?
दूसरी बड़ी है, बीजेपी के सांसद अजय भट्ट को लेकर, अजय भट्ट का कहना है, वो इस बारे में कई बार बात कर चुके हैं, यानी उनकी सुनी नहीं जा रही है. अजय भट्ट ने एक अक्तूबर को चिट्ठी लिखी और आज पांच अक्तूबर हैं, वो मीडिया से बात कर रहे हैं. सवाल यह है – एक अक्तूबर को पत्र लिखने के बाद, इस पत्र के मीडिया के पास आने के बाद, इस पत्र के वायरल होने के बाद भी अजय भट्ट को मीडिया के पास आकर अपनी बात रखनी पड़ रही है और यह कहना पड़ रहा है, उनकी बात पर अधिकारी ऐसी वैसी बातें कर रहे हैं तो यह एक सवाल हो सकता है, अजय भट्ट के लिए, आखिर उनकी बात क्यों नहीं सुनी जा रही है?
सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत के बाद अजय भट्ट बहुत ही मुखर होकर अपनी बात रख रहे हैं, अब देखते हैं, यह बात कहां तक जाती है.
